Posts

रामायण का पंचम कांड : सुंदरकांड

Image
          रामायण के पंचम भाग में सुंदरकांड आता है। इसमें हनुमानजी के लंका प्रवेश से लेकर अशोक-वाटिका में सीताजी को मुंदरी देना, लंका- दहन व पुनः किष्किंधा लौटने के प्रसंग हैं। लंका में प्रवेश कर हनुमानजी सीताजी की खोज में उन्हें ढूंढते हुए अशोक-वाटिका पहुंचे और पेड़ों पर कूदकर वाटिका नष्ट करने लगे। सीताजी एक वानर को देख डरने लगीं तब हनुमानजी ने उन्हें बताया : "माते! मैं श्रीराम के द्वारा आपका समाचार लेने आया हूं।" सीताजी को विश्वास नही हुआ तो हनुमानजी ने श्रीराम की मुंदरी (अंगूठी) उन्हें सौंपी । सीताजी के हर्ष की सीमा न रही। माता सीता ने प्रसन्न होकर हनुमानजी को अजर-अमर रहने का आशीर्वाद दिया और श्रीराम से शीघ्र मिलने की इच्छा जताई। इधर लंका में एक वानर के घुसने और अशोक-वाटिका उजाड़ने का समाचार चारों तरफ फैल गया। राजा रावण के पुत्र इंद्रजीत जिनका एक नाम मेघनाद भी था, मातृ पितृ-भक्त,अत्यंत बलशाली और कुशल योद्धा थे। मेघनाद हनुमानजी को ब्रह्मपाश में बांध रावण के दरबार में ले आए। रावण ने अपने सेवकों को हनुमान का वध करने का आदेश दिया। रावण के छोटे भाई विभीषण भी दरबार...

रामायण का चतुर्थ कांड : किष्किंधा कांड

Image
       रामायण का चौथा कांड " किष्किंधा कांड" है। यह रामायण ग्रंथ के सात कांड में सबसे छोटा कांड है। किष्किंधा कांड में हनुमान के द्वारा सुग्रीव से मिलन और मित्रता, बाली-वध, वानर सेना का गठन और सीता मैया की खोज में हनुमानजी का लंका गमन आदि प्रसंग हैं। राम और लक्ष्मण पंपा सरोवर के निकट सीता की खोज में भटक रहे थे। तभी ब्राह्मण के वेश में हनुमानजी आए। और अत्यंत मधुरता से हाथ जोड़  बोले -" हे महापुरुषों !   आप अत्यंत तेजस्वी और पराक्रमी जान पड़ते हैं। आप किसी चिंता से व्याकुल भी दिखाई देते हैं। मैं आपकी क्या सहायता कर सकता हूं ।" राम,लक्ष्मण हनुमान के ज्ञान विनम्रता और सद्भावना से उन पर मोहित हो गए। श्रीराम ने कहा - " हम आपकी विनम्रता और बुद्धि से प्रभावित हुए हैं। हम आपको अपना मित्र मानते हैं।" हनुमानजी ने उन्हें सुग्रीव से मिलाया। राम ने अपनी व्यथा सुनाई - " मेरी पत्नी सीता का हरण हो गया है। हम दोनों भाई उन्हीं की खोज में निकले है।" सुग्रीव ने कहा - " मित्र, मेरे भाई बाली ने भी मेरा राज्य और मेरी पत्नी रूमा छीन लिए हैं।" राम बोले, मित्र आ...

रामायण का तृतीय कांड : अरण्यकाण्ड

Image
            रामायण के अरण्य काण्ड में राम  के पंचवटी में कुटिया बनाने से शबरी के आश्रम पहुंचने तक का प्रसंग आता है। भरत को विदा करके  राम ने चित्रकूट से प्रस्थान किया  और ऋषि अत्रि  के आश्रम पहुंचे।   कुछ समय विश्राम के पश्चात की ओर चले। आगे उन्होंने शरभंग मुनि से भेंट की। राम के दर्शन की कामना पूर्णभोते ही मुनि ने देह त्याग दी।  सुतीक्ष्ण, अगस्त्य आदि ऋषियों से भेंट करते हुए राम दण्डक वन  पहुंचे। वहां वन में राजा दशरथ के मित्र गरुड़ रूपी  जटायु उन्हें मिले। यहां से आगे राम ने एक अत्यंत रमणीय स्थान पंचवटी में एक झोपड़ी बनाई।  कंद-मूल, फल-फूल का आहार गृहण कर सभी गुजर करने लगे। एक दिवस रावण की भगिनी शूर्पणखा वहां विचरण कर थी। राम को देख कर उनसे विवाह करने की कामना जताई। राम ने कहा : मैं तो पत्नी के साथ हूं, तुम लक्ष्मण के पास जाओ, वह अकेला है।  जब शूर्पणखा लक्ष्मण के पास गई और मना करने पर भी उनसे विवाह करने का निवेदन करने लगी तो क्रोधित लक्ष्मण ने उसके नाक और कान काट दिए।   शूर्पणखा खर- दूषण से सहायता लेन...

रामायण का द्वितीय कांड: अयोध्या काण्ड

Image
       अयोध्या काण्ड: रामायण के इस कांड में राम के राज्याभिषेक की तैयारियों से लेकर भरत के अयोध्या लौटने तक का वृतांत है।  मंथरा नाम की एक नारी रानी कैकई की दासी थी। जब राम के राज्याभिषेक का समाचार उसने सुना तो वह रानी कैकई से कहने लगी : रानी, राम राजा बन गए तो कौशल्या राजमाता बनेंगी उनका मान-सम्मान बढ़ जाएगा और सीता रानी बन जाएगी। आपकी पूछ-परख कम होने लगेगी।  कैकई ने कहा : नहीं, ऐसा नहीं होगा। राम मुझसे और भरत से बहुत स्नेह रखते हैं। वे सदैव मुझे माता के समान आदर देंगे। मंथरा : राजा बनते ही परिस्थितियां बदल सकती हैं। महाराज दशरथ भी राम को अधिक दुलारते हैं। भरत बचपन से ही ननिहाल में पले हैं इसलिए उनका स्नेह भरत पर कम है। कैकई की मति भ्रष्ट हो गई। वह महल में बने कोपभवन में जा बैठी। दशरथ उन्हें ढूंढते हुए वहां पहुंचे तो कैकई बोली : मुझे आपने दो वचन दिए थे। आज उन्हें पूरा करें। पहला वचन भरत को राजगद्दी और राम को 14वर्ष का वनवास दें। दशरथ जी  बोले : रानी, भरत को राज देने में मुझे कोई आपत्ति नहीं है। राम भी सहर्ष तैयार हो जाएंगे।लेकिन राम को वनवास भेजने के...

रामायण का प्रथम कांड - बालकांड

Image
                                  इमेज : pinterest        रामायण हिंदू धर्म का अति महत्वपूर्ण व आदरणीय ग्रंथ है। रामायण में अयोध्या राज्य के राजा दशरथ एवं उनके चार पुत्रों के बाल्यकाल से लेकर भगवान श्री राम के लंका विजय और राज्याभिषेक तक की कथा का वर्णन है। राजा दशरथ के चार पुत्र थे। राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न। रामायण के अनुसार, भरत   भगवान विष्णु के  पंचजन्य शंख  (  Panchajanya Shankh  )  के अवतार थे , जबकि उनके भाई शत्रुघ्न सुदर्शन चक्र के अवतार थे, और राम-लक्ष्मण क्रमशः विष्णु और शेषनाग के अवतार थे, जो सभी भगवान विष्णु के ही अंश थे और उनकी अलौकिक शक्ति का प्रतिनिधित्व करते थे, खासकर भरत ने आदर्श भाई और प्रजापालक के रूप में शंख की भूमिका निभाई.   विस्तार से: बालकांड: रामायण के प्रथम भाग में विश्वामित्र के अयोध्या आने से सीता जी के स्वयंवर तक का प्रसंग निहित है।  ब्रह्मऋषि विश्वामित्र गायत्री मंत्र के रचनाकार और अपने क्रोधित स्वभाव के लिए ...